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Chunaab Ki Kuchh Kavitaaye in Hindi | 2019


नाम जप की सामर्थ्य (या सामर्थ) कितनी है ?

उत्तर:- भगवन्नाम जप की सामर्थ्य अपार है । ईश्वर के नाम का जप मनुष्य में आध्यात्मिक शक्ति तथा गति उत्पन्न कर देता है और आध्यात्मिक संस्कारों को अधिक प्रवल बना देता है । मन्त्र जप से निश्चित रूप वाले आध्यात्मिक स्फुरण उत्पन्न होते हैं । ऊँ नमः शिवाय का जप मस्तिष्क में शिव उत्पन्न करता है और ऊँ नमोः नारायणाय का जप श्री हरी रूप प्रकट करता है । नाम के पीछे नामी छुपा हुआ रहता है । श्रद्धापूर्वक , प्रार्थनापूर्वक , भावपूर्वक हृदय से जब भी उसे पुकारा जाता है तो कभी-कभी वो प्रकट भी हो जाता हैं । अतः यदि उसे सच्चे भाव से जपा जाए तो भगवान् सदैव अपने-अपने भक्तों की रक्षा करते हैं ।

नाम जाप करने से होता क्या है और इससें कितनी शक्ति मिलती हैं ?

उत्तर:- एक बीज कितना सक्षम है वह वृक्ष बनने के बाद ही पता चलता है, ठीक वैसे ही ईश्वर के नाम की असीम शक्ति समय आने पर ही पता चलती है । यह शक्ति एक जन्म में ईश्वर का भजन करने से करोड़ों जन्में की पाप मात्रा को नष्ट कर देती हैं । ईश्वर साक्षात्कार , आत्म-साक्षात्कार करने के जितने भी साधन शास्त्रों ने निर्देश किए हैं , जप उन सबमें सुगम और अधिक प्रभाव प्रद साधन है । यह निश्चयतः भक्त को भगवान के सान्निध्य में पहुंचाता है । यदि जप का अभ्यास सतत अवैध और नियमपूर्वक किया जाता रहे तो भक्त को अनेकों आश्चर्यजनक सीढियाँ भी प्राप्त हो जाती है , जिन्हें दृढयोगी या राजयोगी अपनी कठिन योगसाधना द्धारा अत्यंत कष्ट सहकर प्राप्त करते हैं । प्रत्येक नाम अचिन्तय शक्ति समन्वित है । जैसे अग्नि में प्रत्येक वस्तु को भस्म करने की स्वाभाविक शक्ति है, ठीक उसी प्रकार ईश्वर के नाम में हमारे पापों और वासनाओं को दुग्ध कर देने की शक्ति समाहित है ।

चुनाब की कुछ कविताये 2019

अब अपने अंगना में नेता जी आएंगे ।
संग अपने चमचों का दरवार सजाएंगे ॥

जो मांगोगे सबकुछ मिल जायेगा झटपट ।
झूठे से वादों का वह जूस पिलाएंगे ॥

अगली – पिछली परतें रिश्तों की खोलेंगे ।
जब जीत गए तब तो पहचान न पाएंगे॥

जो धन इनको मिलता ये खूब उड़ातें हैं ।
विकास के नाम पे तो ठेंगा दिखलायेंगे ॥

यदि दुम हिलाते तुम संग – संग में भागोगे ।
मुर्गे – सुर्गे मदिरा वह खूब पिलाएंगे ॥

संतोष भूल के भी चमचा न बनेंगे जी ।
अपनी सद्बुद्धि से हम वोट को पाएंगे ॥

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चुनावी दौर (नेता जी की ओर से )

चुनावी दौर आया हैं । चुनावी दौर आया हैं ।
जनता को खूब बेबकूफ बनाएंगे ॥
उन्हीं के ही हाथों प्रचार करवाएंगे ॥
संगी – साथी हम पर नोट बरसाएंगे।
मीट , मॉस , मदिरा से मोटे हो जाएंगे ॥
भोली – भाली जनता को खूब छकाया है-
चुनावी दौर आया हैं । चुनावी दौर आया हैं ।

चुनावी दौर २

चुनावी दौर आया हैं । चुनावी दौर आया हैं ॥
हमने तो नेता जी को घर में बुलाया है ॥
समोसे , लड्डू , टिक्की , फल-फूल मँगवाए हैं ।
संगी – साथी रिश्तेदार इकट्ठे करवाएं हैं ॥
टी.वी . मीडिया को भी मैसेज पहुंचाया है –
चुनावी दौर आया हैं । चुनावी दौर आया हैं ॥

खूब सारे संग में फोटू खिंचवा लिए ।
नेता जी से झूठे- झूठे वादे करवा लिए ॥
पता चला -२
पता चला नेता जी को टिकट नहीं पाया है ।

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रोना आता है मुझे

आईने में अपनी मुस्कुराहट देख कर ।
रोना आता है मुझे ॥
हँसी देख कर भी रोना आता है मुझे ।
देख ले अगर
भूले से भी तू मुझको
तो छुप जाना
मेरे कर्ज़दार !
बेवफ़ा चेहरों को देख कर
रोना आता है मुझे ॥
ओ साथी !
चुनावों में जीते हुए
नेता की तरह
क्यों भूल गया
तू अपने वादे
तेरी सूरत
आईने में देख कर
रोना आता है मुझे ॥

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